गुरुवार, 22 जुलाई 2010

२०१० के पूर्वार्ध में हुए विनाशकारी भूकंप

भूकंप की महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाता नक़्शा ( जनवरी २०१० से जून २०१० )

Image: Quakeschool 2010

सब यह अच्छी तरह से जानते है कि भूकंप की घटनाएं दुनिया भर में आम हो गई है, और जिन घटनाओ में उल्लेखनीय मात्रा में जान-माल का नुकसान होता है वे सुर्खियों में आती है। शायद, आम आदमी का इन्टरनेट जैसे मीडिया और संचार उपकरणों से बढ़ता हुआ संपर्क इस उद्वेग एवं चिंता को पैदा करने वाला एक मुख्य कारण है। तकनीकी अवलोकनों पर प्रभाव डालनेवाली इस असर का रोचक अभ्यास [होघ, मार्टीन, बिल्हाम और एटकिन्सन] ने किया है।

फिर भी, इन्टरनेट के इसी स्रोत का सावधानी से उपयोग करके हम एक कोष्टक बना सकते हैं। इस कोष्टक और उपर दिए गए नक़्शे में २०१० के वर्ष के पूर्वार्ध में हुए विनाशकारी भूकंप के स्थान दर्शाए गए हैं।

स्कुलों और शैक्षिक संस्थाओं की संपत्ति को होते नुकसान तथा मौत एवं चोट की घटनाओं पर यहां ध्यान केन्द्रित किया जा सकता है। और ये भूकंप कब हुए थे, उसका समय भी दिया गया है |
हम यहां कोई निष्कर्ष नहीं देना चाहते है हम तो अपने वाचको के विचारो को स्थान देना चाहेंगे |

बड़े पैमाने पर नुकसानकारी भूकंपों को दर्शाता कोष्टक

संख्या

स्थानिक समय

सार्विक तारीख Universal Date (2010)

मात्रा **

स्थान

जानहानी *

स्कुल (जानहानी/चोट/इमारत नुकसान) *

सुबह ०४:५३

१२ जनवरी

७.०

हैती क्षेत्र

२,३३,०००

कोई जानहानी या चोट नहीं।

नोंध: स्कुलों के कामकाज के समय में नहीं हुआ।

लगभग ५००० स्कुल इमारतों पर असर।

सुबह ०३:३४

२७ फरवरी

८.८

चीली का माउले क्षेत्र

४३२

से

७००

कोई जानहानी या चोट नहीं।

नोंध: स्कुलों के कामकाज के समय में नहीं हुआ

/वेकेशन समय में हुआ |

स्कुलों के ढांचों को नुकसान होने के अखबारी रीपोर्ट

लगभग १००० स्कुलों को नुकसान होने का अनुमान |

मध्याह्न १२:४५

२७ फरवरी

६.१

साल्या, आर्जेन्टिना

कोई जानहानी या चोट नहीं।

कच्ची झुग्गीयां या खराब तरीके से बनाए गए छोटे मकानों को नुकसान। आकड़ो का अभाव।

सुबह ०४:३२

८ मार्च

६.०

ओकुलर, एलेझीग क्षेत्र, तूर्की

५७

कोई जानहानी या चोट नहीं। नोंध: स्कुलों के कामकाज के समय में नहीं हुआ।

क्षेत्र में ज्यादातर दिखनेवाली एक-मंजिला विशिष्ट इमारतों को स्कुलों की विशिष्ट इमारतों को नुकसान हुआ और आंकडे उपलब्ध नहीं

सुबह ०७:३९

११ मार्च

६.९

पिचीलेमु, चीली

कोई जानहानी या चोट नहीं। नोंध: स्कुलों के कामकाज के समय में नहीं हुआ।

ऐसा लगता है कि इमारतों को कम नुकसान हुआ।

नोंध:
*
इस बात पर गौर करे कि कुछ आंकड़े औसत और मापदंड सामान्य हो सकते है। यह संचारण की सहुलियत के लिए किया गया है।
**यह एक सरल कोष्टक है, इस लिए कठीन इकाईओं को निकाल दिया गया है, ज़्यादा जानकारी के लिए संदर्भ देखें।

संदर्भ

  1. २०१० भूकंपों की विकिपीडीया सूचि (21st Century Earthquakes)
  2. युनाइटेड स्टेट्स जीओलोजिकल सर्वे (http://earthquake.usgs.gov)
  3. इन्टरनेट पर विविध स्रोत (समाचार/रीपोर्ट्स)


सोमवार, 21 जून 2010

भगदड़ के जोखिम


यह ब्लॉग हमारे पिछले ब्लॉग के अनुबंध मे है। जिस चीज़ को हमारे दोस्तों नें सटीक ढंग से दर्शाया है, और जिसके साथ हम सहमत है, उसके मुताबिक स्कूलों में सुरक्षा ड्रिल्स जिंदगियां बचाने की दिशा में नि:संदेह ही एक जरुरी कदम है। इस चर्चा को जारी रखने की भी हमारी इच्छा है, क्योंकि हमें लगता है कि हमारे पिछले पोस्ट में कुछ सवालों के उत्तर रह गए थे। ये निम्नलिखित है:

  1. स्कूलों में ऐसी स्थानांतर ड्रिल्स किए जाने पर भगदड़ की संभावना कितनी है?
  2. ड्रोप-डक-कवर-होल्ड के अलावा अन्य पद्धतियां कौन सी हैं?
  3. विकासशील देशों के सत्ताधारी ऐसी ड्रिल्स करने के बारे में सजग क्यों नहीं हैं?


उपरोक्त पीछले दो सवालों के जवाब देने का उत्तरदायित्व इस विषय के विशेष विशेषज्ञों पर छोडकर हम प्रथम सवाल के संदर्भ में एक द्रष्टिकोण अवश्य ही प्रस्तुत कर सकते हैं।

उत्तर है, भगदड़ की संभावना अत्यंत कम है, मगर शायद इसके बारे में स्पष्टता की ज़रूरत है।

एक गलत चेतावनी से आतंक फैल सकता है, फिर भी स्थानांतर ड्रिल्स तथा वास्तविक आपातकालीन (कुदरती) घटनाएं ज्यादातर संकलित घटनाएं हैं। संभावना शून्य ली जा सकती है, परंतु भीड़वाली जगहों पर भगदड़ मच सकती है। भीड़ का संचालन इसका एक उत्तर है और अनुसंधान जारी है तथा जानकारी बढ़ रही है। उदाहरण के तौर पर पीछली सदी में भगदड़ संबंधित घटनाओं के बारे में विकिपीडिया की सूची
, और अब इस प्रथम दशक में ही घटी तीस घटनाएं देखें। एक चीज़ ध्यान देने लायक है, कि ऐसी सूचनाओं के बारे में हमारी जानकारी अब बढ़ रही है। एक और बात यह भी ध्यान देने लायक है कि जानवरों की तरह या उनसे विपरीत, मनुष्य भी अगर किसी स्थल पर उपस्थित रहेने के स्पष्ट उद्देश के अभाव की स्थिति में अव्यवस्था तथा भगदड़ के शिकार होते हैं। दंगों जैसी घटनाएं, खेल के दौरान इकठ्ठा होता समूह या धार्मिक समारोह जैसी घटनाएं इस सूची में दिए गए उदाहरणमात्र है।

सौभाग्यवश, जहां शिक्षण एवं उसके स्थानों को गंभीरतापूर्वक ध्यान में लिया जाता है, वहां ऐसी ज्यादातर समस्याएं सतर्कता एवं निवारण के उपाय मात्र से बहुत हद तक टाली जा सकतीं है।

भीड़वाली जगहों में आपातकालीन योजना, छोटे मार्ग, रुकावटों या रुकावटों का अभाव, नियंत्रित भीड़ प्रवाह, संतुलित भीड़ प्रमाण (या गतिविधि) पर अभ्यास इन उपायों के कुछ उदाहरण हैं।

और स्कूलें एवं शैक्षणिक संस्थाएं ऐसी स्थल हैं जहाँ यह सब सिखाया जा सकता है।

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भगदड के अर्थ को वैज्ञानिक तौर पर (ज्यादा सटीकता से भौतिकशास्त्र में) 'आवेग'(Impulse) शब्द में समाया जा सकता है। आवेग को शरीर की गतिविधियों में ‘बदलाव’(Change in Momentum) या फिर अन्य शब्दों में, संबंधित शरीर के ‘द्रव्यमान’(Mass) तथा ‘वेग’(Velocity) में होते बदलाव के तौर पर परिभाषित किया जा सकता है। जब ज्यादा शरीर हो, तब विविध प्रकार के द्रव्यमान और वेग कि उपस्थिति में ये शरीर एक दूसरे से टकराते हैं।

कुदरत के नियमों को तोड कर मनुष्य दो तरिकों से कार्य कर सकता हैः

1.अपनी रफ़्तार के परिवर्तन को अंकुशित कर के

2.अपना वज़न घटा कर

बाहर जाते समय अपनी वृत्तियों को सहज रखें, इतना ही नहीं अपनी रफ्तार को भी अंकुश में रखें और दूसरों पर से आपका वज़न हटाएं। दूसरे शब्दों में, खतरे की घंटी बजने पर साथ मिलकर सहजता एवं सतर्कतापूर्ण वर्ताव करें।

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संदर्भ: