शुक्रवार, 17 सितंबर 2010

क्वेकस्कुल वेबसाइट का प्रारंभ

हमारी वेबसाइट (लिंक) का प्रारंभ करते हुए हमे अत्यंत खुशी हो रही है। हमें आशा है कि इस से हम हमारे कार्य की अद्यतन सूचनाओं को आप तक पहुँचा सकेंगे। इसके अलावा, हम कुछ अद्यतन समाचार, केन्द्रित ब्लोग लेखन और अन्य रसप्रद सामग्री के साथ ज़्यादा से ज़्यादा लोगों में रूचि पैदा करने की आशा रखते हैं।

समाचारों तथा ब्लोग्स को बड़े ध्यान और सावधानी से चयनित किया जाता हैं। इन ब्लोग्स का स्थानीय भाषाएं हिन्दी तथा गुजराती में अनुवाद किया जाता है। हमने ब्लोग अंतराफलक के लिए ब्लॉगर.कॉम (लिंक) का उपयोग किया है, जो ओपन सोर्स कै तौर पर उपलब्ध है।

हमने ‘टुल्स विन्डो’ नामक एक विशेष सुविधा का उपियोग करने का भी प्रयास किया है, जो कि वेबसाइट के मुख पृष्ट पर है। यह एक ऐसी जगह देता है, जहां हम खास अंकीय वातावरण से जुडे हुए विशिष्ट सम्पर्क रख सकते है। हाल में उस पर कुछ साधन उपलब्ध है, जैसे कि ‘हेझार्ड इन्फोर्मर’ नामक प्रथम उपकरण एक ऐसा साधन है जो जन साधारण व्यक्ति को भूंकप की घटना या फिर सरल शब्दों में ज़मीन की अस्थिरता का वितरण पृथ्वी पर किस प्रकार हुआ है उसकी जानकारी देता है। दूसरा उपकरण ‘सिस्मिक रिस्क का मूल्यांकन टूल’ है। यह एक प्रकार का व्यापक साधन है जो किसी भी जगह या कार्यालयों पर भूकंप के जोखिम का अंदाजीत मापन करता है। यह साधन इमारतों तथा औद्योगिक स्थलों पर भूकंप होनेवाली संभवित क्षति, जानमाल के संभवित नुकसान से उनके मालिकों को अवगत कराता है जिससे वे होने वाले नुकसानों को कम कर सकें।

हम अपेक्षा करते हैं कि हम और ज्यादा साधन आप तक पहुँचा सकेंगे। इन इन्टरनेट के साधनों पर काम जारी हैं, जिस के लिए आपकी टिप्पणियाँ और सुझाव आवशक है। जैसे कि सुविधा खोजक फेसिलिटी फाइनडर (लिंक) जो हमने इंडिया स्कूल सेफ्टी पोर्टल (लिंक) के लिए बनाया है, वह विद्यालयों के लिए एक उपयोगी संसाधन उपकरण है जिस से समीपस्थ बाह्य संसाधन की खोज की जाती है और यह आपातकाल परिस्थितियों में काम आ सकता है। यदी आप इन साधन के विकास संबंधित सूचनाओं में दिलचस्पी रखते हो तो कृपया हमें संपर्क करें।

ओपन फेस जुमला का उपयोग करके अत्यंत परिश्रम एवं धैर्य से वेबसाइट अपलोड करने के लिए हम सुमित (लिंक) के आभारी हैं।

डिजिटल माध्यम में नवीन मार्गों से और ज्यादा शोधकार्य करने के लिये हम प्रयत्नशील रहेंगे।

गुरुवार, 19 अगस्त 2010

विकासशील देशों की स्कुलों में बुनियादी की सुविधाओं के बारे में कुछ विचार

स्कूलों में बच्चे पढ़कर ज़िम्मेदार नागरिक बनते हैं। इसलिए, यह आवश्यक है कि जिस वातावरण में पाठशाला कार्य करती हैं, वह वातावरण विद्यार्थियों में सुरक्षा, सुविधा और सर्जनात्मकता की भावना प्रेरित करें। विद्यार्थियों में सुरक्षा की भावना प्रेरित करने के लिए वर्गखंडों का बूनियादी तौर पर सलामत और विश्वसनीय होना ज़रूरी है। योग्य क्रिडांगण, जहां रीसेस के दौरान विद्यार्थी खेल ऍव विश्राम कर सकें, वह स्कूल का महत्वपूर्ण लक्षण हैं। यह बडे दुःख की बात है कि विकासशील देशों के कई शहरों और कस़्बों की ज़्यादातर स्कूलों में इन सुविधाओं का अभाव हैं। स्कूलों को जगह और गुणवत्तायुक्त शिक्षण की बूनियादी सुविधाओं के बिना शोपिंग कोम्प्लेक्सों में ठूंस दिया जाता है। ऐसी स्कूलों की भारत में बाढ़ सी आ गई है। ऐसी स्कुलें दुर्घटनाओं का इंतजार कर रही है, क्योंकि यहाँ, क्रिडांगण जैसी सुविधाओ का अभाव है।

इसलिए ऐसी स्कुलों पर आग व अन्य आकस्मिक विपदाओ का बडा जोखिम रहता है। विद्यार्थियों को बाहरी भीड और ट्राफिक के साथ घुल जाना पडता है और उनकी अपनी कोई जगह का होना संभव नहीं है। इससे सुरक्षा संबंधित गंभीर चिंताएं पैदा हो सकती है खुली जगह , बालको की गिनती और अन्य संकट प्रबंधन तकनीकों के प्रावधानों से स्थिती में सुधार आ सकता है

सभी स्कूलों में चिकित्सालय हो उसका ख्याल रखा जाना चाहिए। स्कूलों में फायर सेफ्टी ड्रील्स दाखल करनी चाहिए, जिससे विद्यार्थी आग संबंधित आपत्तियों के लिए सज्ज हो सकें। भूकंप, बम विस्फोट की धमकियां, इत्यादि जैसी बाह्य आपत्तियों के लिए अलग कवायत होनी चाहिए। स्कूल सबंधित स्थानांतर योजनाएं सुचारू रूप से लागु की जानी चाहिए तथा उसके रीहर्सल्स होने चाहिए। स्कुलों में प्रवेश के संदर्भ में सुगम्यता भी दूसरा महत्व का लक्षण है। स्कूल को पूर्वाभ्यास होना चाहिए, जिससे स्कुलों में अग्निशामक वाहनों तथा एम्ब्युलन्सों को प्रवेश में होती समस्याएं जान सकते है। समग्रतया संकुलों की सलामती अत्यंत गंभीरता से ली जानी चाहिए, जिससे विद्यार्थीओं की सुरक्षा में कोई कमी ना रहें।

सुरक्षित स्कूल सभी के हित में हैं। स्कुल के वातावरण में सुरक्षा और सुविधा की भावना पैदा करके हम इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि विद्यार्थी अपना श्रेष्ठ कार्य कर सकें।

गुरुवार, 22 जुलाई 2010

२०१० के पूर्वार्ध में हुए विनाशकारी भूकंप

भूकंप की महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाता नक़्शा ( जनवरी २०१० से जून २०१० )

Image: Quakeschool 2010

सब यह अच्छी तरह से जानते है कि भूकंप की घटनाएं दुनिया भर में आम हो गई है, और जिन घटनाओ में उल्लेखनीय मात्रा में जान-माल का नुकसान होता है वे सुर्खियों में आती है। शायद, आम आदमी का इन्टरनेट जैसे मीडिया और संचार उपकरणों से बढ़ता हुआ संपर्क इस उद्वेग एवं चिंता को पैदा करने वाला एक मुख्य कारण है। तकनीकी अवलोकनों पर प्रभाव डालनेवाली इस असर का रोचक अभ्यास [होघ, मार्टीन, बिल्हाम और एटकिन्सन] ने किया है।

फिर भी, इन्टरनेट के इसी स्रोत का सावधानी से उपयोग करके हम एक कोष्टक बना सकते हैं। इस कोष्टक और उपर दिए गए नक़्शे में २०१० के वर्ष के पूर्वार्ध में हुए विनाशकारी भूकंप के स्थान दर्शाए गए हैं।

स्कुलों और शैक्षिक संस्थाओं की संपत्ति को होते नुकसान तथा मौत एवं चोट की घटनाओं पर यहां ध्यान केन्द्रित किया जा सकता है। और ये भूकंप कब हुए थे, उसका समय भी दिया गया है |
हम यहां कोई निष्कर्ष नहीं देना चाहते है हम तो अपने वाचको के विचारो को स्थान देना चाहेंगे |

बड़े पैमाने पर नुकसानकारी भूकंपों को दर्शाता कोष्टक

संख्या

स्थानिक समय

सार्विक तारीख Universal Date (2010)

मात्रा **

स्थान

जानहानी *

स्कुल (जानहानी/चोट/इमारत नुकसान) *

१

सुबह ०४:५३

१२ जनवरी

७.०

हैती क्षेत्र

२,३३,०००

कोई जानहानी या चोट नहीं।

नोंध: स्कुलों के कामकाज के समय में नहीं हुआ।

लगभग ५००० स्कुल इमारतों पर असर।

२

सुबह ०३:३४

२७ फरवरी

८.८

चीली का माउले क्षेत्र

४३२

से

७००

कोई जानहानी या चोट नहीं।

नोंध: स्कुलों के कामकाज के समय में नहीं हुआ

/वेकेशन समय में हुआ |

स्कुलों के ढांचों को नुकसान होने के अखबारी रीपोर्ट

लगभग १००० स्कुलों को नुकसान होने का अनुमान |

३

मध्याह्न १२:४५

२७ फरवरी

६.१

साल्या, आर्जेन्टिना

२

कोई जानहानी या चोट नहीं।

कच्ची झुग्गीयां या खराब तरीके से बनाए गए छोटे मकानों को नुकसान। आकड़ो का अभाव।

४

सुबह ०४:३२

८ मार्च

६.०

ओकुलर, एलेझीग क्षेत्र, तूर्की

५७

कोई जानहानी या चोट नहीं। नोंध: स्कुलों के कामकाज के समय में नहीं हुआ।

क्षेत्र में ज्यादातर दिखनेवाली एक-मंजिला विशिष्ट इमारतों को स्कुलों की विशिष्ट इमारतों को नुकसान हुआ और आंकडे उपलब्ध नहीं ।

५

सुबह ०७:३९

११ मार्च

६.९

पिचीलेमु, चीली

२

कोई जानहानी या चोट नहीं। नोंध: स्कुलों के कामकाज के समय में नहीं हुआ।

ऐसा लगता है कि इमारतों को कम नुकसान हुआ।

नोंध:
*
इस बात पर गौर करे कि कुछ आंकड़े औसत और मापदंड सामान्य हो सकते है। यह संचारण की सहुलियत के लिए किया गया है।
**यह एक सरल कोष्टक है, इस लिए कठीन इकाईओं को निकाल दिया गया है, ज़्यादा जानकारी के लिए संदर्भ देखें।

संदर्भ

  1. २०१० भूकंपों की विकिपीडीया सूचि (21st Century Earthquakes)
  2. युनाइटेड स्टेट्स जीओलोजिकल सर्वे (http://earthquake.usgs.gov)
  3. इन्टरनेट पर विविध स्रोत (समाचार/रीपोर्ट्स)


सोमवार, 21 जून 2010

भगदड़ के जोखिम


यह ब्लॉग हमारे पिछले ब्लॉग के अनुबंध मे है। जिस चीज़ को हमारे दोस्तों नें सटीक ढंग से दर्शाया है, और जिसके साथ हम सहमत है, उसके मुताबिक स्कूलों में सुरक्षा ड्रिल्स जिंदगियां बचाने की दिशा में नि:संदेह ही एक जरुरी कदम है। इस चर्चा को जारी रखने की भी हमारी इच्छा है, क्योंकि हमें लगता है कि हमारे पिछले पोस्ट में कुछ सवालों के उत्तर रह गए थे। ये निम्नलिखित है:

  1. स्कूलों में ऐसी स्थानांतर ड्रिल्स किए जाने पर भगदड़ की संभावना कितनी है?
  2. ड्रोप-डक-कवर-होल्ड के अलावा अन्य पद्धतियां कौन सी हैं?
  3. विकासशील देशों के सत्ताधारी ऐसी ड्रिल्स करने के बारे में सजग क्यों नहीं हैं?


उपरोक्त पीछले दो सवालों के जवाब देने का उत्तरदायित्व इस विषय के विशेष विशेषज्ञों पर छोडकर हम प्रथम सवाल के संदर्भ में एक द्रष्टिकोण अवश्य ही प्रस्तुत कर सकते हैं।

उत्तर है, भगदड़ की संभावना अत्यंत कम है, मगर शायद इसके बारे में स्पष्टता की ज़रूरत है।

एक गलत चेतावनी से आतंक फैल सकता है, फिर भी स्थानांतर ड्रिल्स तथा वास्तविक आपातकालीन (कुदरती) घटनाएं ज्यादातर संकलित घटनाएं हैं। संभावना शून्य ली जा सकती है, परंतु भीड़वाली जगहों पर भगदड़ मच सकती है। भीड़ का संचालन इसका एक उत्तर है और अनुसंधान जारी है तथा जानकारी बढ़ रही है। उदाहरण के तौर पर पीछली सदी में भगदड़ संबंधित घटनाओं के बारे में विकिपीडिया की सूची
, और अब इस प्रथम दशक में ही घटी तीस घटनाएं देखें। एक चीज़ ध्यान देने लायक है, कि ऐसी सूचनाओं के बारे में हमारी जानकारी अब बढ़ रही है। एक और बात यह भी ध्यान देने लायक है कि जानवरों की तरह या उनसे विपरीत, मनुष्य भी अगर किसी स्थल पर उपस्थित रहेने के स्पष्ट उद्देश के अभाव की स्थिति में अव्यवस्था तथा भगदड़ के शिकार होते हैं। दंगों जैसी घटनाएं, खेल के दौरान इकठ्ठा होता समूह या धार्मिक समारोह जैसी घटनाएं इस सूची में दिए गए उदाहरणमात्र है।

सौभाग्यवश, जहां शिक्षण एवं उसके स्थानों को गंभीरतापूर्वक ध्यान में लिया जाता है, वहां ऐसी ज्यादातर समस्याएं सतर्कता एवं निवारण के उपाय मात्र से बहुत हद तक टाली जा सकतीं है।

भीड़वाली जगहों में आपातकालीन योजना, छोटे मार्ग, रुकावटों या रुकावटों का अभाव, नियंत्रित भीड़ प्रवाह, संतुलित भीड़ प्रमाण (या गतिविधि) पर अभ्यास इन उपायों के कुछ उदाहरण हैं।

और स्कूलें एवं शैक्षणिक संस्थाएं ऐसी स्थल हैं जहाँ यह सब सिखाया जा सकता है।

--

भगदड के अर्थ को वैज्ञानिक तौर पर (ज्यादा सटीकता से भौतिकशास्त्र में) 'आवेग'(Impulse) शब्द में समाया जा सकता है। आवेग को शरीर की गतिविधियों में ‘बदलाव’(Change in Momentum) या फिर अन्य शब्दों में, संबंधित शरीर के ‘द्रव्यमान’(Mass) तथा ‘वेग’(Velocity) में होते बदलाव के तौर पर परिभाषित किया जा सकता है। जब ज्यादा शरीर हो, तब विविध प्रकार के द्रव्यमान और वेग कि उपस्थिति में ये शरीर एक दूसरे से टकराते हैं।

कुदरत के नियमों को तोड कर मनुष्य दो तरिकों से कार्य कर सकता हैः

1.अपनी रफ़्तार के परिवर्तन को अंकुशित कर के

2.अपना वज़न घटा कर

बाहर जाते समय अपनी वृत्तियों को सहज रखें, इतना ही नहीं अपनी रफ्तार को भी अंकुश में रखें और दूसरों पर से आपका वज़न हटाएं। दूसरे शब्दों में, खतरे की घंटी बजने पर साथ मिलकर सहजता एवं सतर्कतापूर्ण वर्ताव करें।

--

संदर्भ: